Posts

Showing posts from 2020

Alvida Anil

अभि तो कहीं देखा था अब कहां चला गया है एक पल हंसता तो था वह दूजे में नजाने कहां चला गया है अनबुझ सी यह जिंदगी कितनी अनजान अजनबी सी है एक हस्ता खेलता घरौंदा पल में बिखर के चूर हो गया है जाना पहचाना जो था पलक झपकते पराया हो गया है नज़र आता तेरा मुस्कुराता चेहरा जैसे तू कहीं तो पहुंच गया है रह गई है बातें तेरी एय दोस्त कुछ न बचा, बस यही अब रह गया है

Shaheed Rattan Lal

विरोध करना गुनाह नहीं था पर क्या पत्थर उठाना ज़रूरी था? कौन कहता है कि तुम साब मान लो पर क्या तुझे मारना ज़रूरी था? एक पिता, एक पति, एक बेटा क्या इतना हत्या ज़रूरी था? Note: Late Shri Ratan Lal was a police constable who lost his life in the Delhi riots post the Anti-CAA protests and agitations. These 2 lines are dedicated to him.

जय श्री राम

प्रभु तेरे कितने नाम, आज कौनसा पुकारूं श्री राम कहूं, भय है कोई आतंकवादी ना कह दे तुझी से भक्ति का आरंभ है, ज्ञान है, सत्य है तुझी पे भय का अंत है, परन्तु, फिर भी भय है तूने बनवास कटाई, हम एक दिन न ठीक से काटे तू मुस्कुराते चला गया, हम शिकायत करते रहे मर्यादा परुषोत्तम है तू, सब कुछ त्याग दिया हम घृणा को त्याग न सके, मर्यादा हरा दिया तेरी आवश्यकता है हमें, कहां चला गया तू तेरे लौ से वंचित यह धरती, पुकारे आज तुझे

बूढ़े बाबा १

जब वह लाठी उठाया था और बाबा की हड्डी टूटी थी कया तेरा हाथ नहीं कांपा था? जब उनकी जान जा रही थी सिसकियां निकल रही थी कया तुझे संकोच तक नहीं हुआ था? निहत्थे और मजबूत पर ऐसा झुंड बनाकर शिकार करते वक़्त कौनसा भेड़िया तेरे खून में दौड़ रहा था? ऐसा कया गुनाह किया था उस बाबा ने की निर्ममता की सारी हदों को पार कर कया ऐसा हैवानियत जायज़ था?

वह सरदार था

भेद भाव मिटाया जिसने, इज्जत बक्शा बिखरे हुए समाज को समेटा, वह सरदार था बाबर से लेके औरंगज़ेब की शमशीर तक सर कटवाया, खुदको वार दिया, वह सरदार था भूकंप, महामारी, तूफान हो या बहाड़ खाना खिलाया, कपड़ा दिलाया, वह सरदार था हिन्दुस्तान जब कटा था, दो टुकड़ों में बटा था जिसका कत्ल हुआ, जिसका पंजाब कटा, वह सरदार था सलाम है तुम्हारी कुर्बानी को, दुआ है मेरे रब से उन दरिंदों को ऐसी सज़ा मिले, जो उनके सात पुश्तों ने ना सोचा था

असमंजस

जे छूटे है आज लागे मेरा देस है जे जड़ को रखे है बुलाए अपने पास है पथ कौन सा लू मन में असमंजस है मन न माने पर तन तो जाने है कि कौन भी पथ लू पहुँच तो एकही जगह है

बूढ़े बाबा २

ओझल नहीं होता वह नज़ारा बिनती और बर्बरता का दर्दनाक संगम इस पार से उस पार तक का फासला उसको तय करने का अमानवीय फैसला वह चेहरा आंसुओं भरा वह प्राणों की भिक्षा मांगते हुए बूढ़े बाबा वह झुंड में भेड़ियों सा हत्या करना ओझल नहीं होता वह नज़ारा कहां गए वह मित्र मेरे वह धर्मनिपेक्षता के रखवाले कहां गए वह आजादी के नारे लगाने वाले वह मानवता के भाषण देने वाले  आज इतने चुप क्यूं बैठे है सब वह आवाज़ उठाने वाले,  वह राष्ट्रवादी, वह भारी पड़ने वाले कहां गए वह देशप्रेमी, वह न्याय के प्रतिमाएं चौकीदार को चोर कहके विद्रोह करने वाले इस अमानवीय नरसंहार पे खामोश रहने वाले धिक्कार ना लो, लोगों की आह ना लो खून को खून रहने दो, पानी ना बनाओ इन्सानियत पे यूं बोझ न बनो  जो सही में गलत है, उसके लिए आवाज़ उठाओ जो गलत गलत है, उसपे वक़्त बर्बाद ना करो देश पुकार रहा है, अपने सोए हुए ज़मीर को जगाओ

Bullet Sardaar

वैसे उम्र तो गुजारी हमने पर एसी मजबूरी ना देखी पाजी भाई को खोया हमने पर ऐसा दर्द ना देखा पाजी बेहद मुहहबत है इस लोहे से किसी और के लिए तरसा नहीं पाजी आप खुदा हो मेरे, रहम करो इलज़ाम कुछ भी नहीं आप पे पाजी गुनाह कुछ तो किया होगा हमने वरना तीन साल से सजा क्यों मिली पाजी आप के लिए दुआ ही दुआ है खुश रहो, फलो फूलों आप पाजी वाहे गुरु आपको करम दे मेरा गाड़ी मुझे दिला दो पाजी

Nafrat ki panktiyan

नफरतों के पुल पर बांधा हुआ ज़िद अपनों को दाव पे लगाने का हौसला देता है जिनका भरोसा जीतकर यह सफर तय किया उन्हीं के अरमानों का कब्र खोदने से राहत मिलता है

My interview with an ad agency

अत्तर ख़रीदको मईँ चार्मिनारा में घूमा सीवी लेको मईँ इंडिया के चार किनारा में घूमा इंटरव्यू लेको सब्बिच बोले, बाद में फ़ोन करोजी तुमे फ़ोन करको पूछे तो बोले रिकारमेंट नइ जी हमे अयीसइच एक स्टोरी सुनाता जबी पोट्टा गिया चेन्नई दाड़ी काटको, सामपु लगाको, पइनके गया सूट बूट आउर टाई अम्मा बोली थी बीटा, दरगा में जाना, चद्दर चढ़ाना इंटरव्यू में जाको सब्बिच बोलना, नक्को घबराना अम्मा का बात माना, दिल में लिया मौला का नाम सीवी गीवी रेडी करको, चला पोटटा जिगड़ा थाम वह बोले, क्या जी तुमे चितरा गितरा लेके आती मईँ बोला, मेरा दिमागां इसमें बेस्ट कामा करती पन्ना पन्ना परखा, एंगल बदल बदल को देखा जॉइनिंग कबि करेगा, पुचको एक छोटा बम फेका कॉल्लेजी निकलको पैरान में फेका मईँ   तुमे डेटां बोलोजी अन्य्तिमे रेडी मईँ थोड़ा मुस्कुराया, थोड़ा दांतां दिखाया, फिर बोला बेटा, तुमे चित्रा गितरा कागज में अच्छा कारको डाला तुम चित्रा बनाओ जी, इदर कईको आता तुम्मारा टाइप का हम्मारा रिकारमेंट नई होता घर से फ़ोन आये तो अब्बा पूछे 'क्या हुआ'? रीडायल मारको, गल्ला स...

The Lost Hindu

India, Hindustan...has always been invaded sinces ages...looted, plundered to the extent of rubble. Hindus...for all these centuries have been attacked, temples destroyed, forcibly converted, women raped...and it still happens in Pakistan which the new age protesters of India choose to ignore. What is tragic is that Hindus have always been a majority in this country since ages, since centuries. Even today, Hindus are a majority. And even today, Hinduism is being attacked. What has changed??? Nothing... Minority institutions in India are treated with a silver spoon, who are absolutely clear and open on their agenda. But when there is one BJP, or one RSS has a HINDUTVA identity, stands for Hinduism - the whole nation has a problem. I ask one question today to all the Haters Brigade of India - WHAT MAKES YOU SO ASHAMED IN BEING A HINDU?

Paaji

वैसे उम्र तो गुजारी हमने पर ऐसी मजबूरी ना देखी पाजी भाई को खोया हमने पर ऐसा दर्द ना देखा पाजी बेहद मुहहबत है इस लोहे से किसी और के लिए तरसा नहीं पाजी आप खुदा हो मेरे, रहम करो इल्जाम कुछ भी नहीं आप पे पाजी गुनाह कुछ तो किया होगा हमने वरना तीन साल से सजा क्यों मिली पाजी आप के लिए दुआ ही दुआ है खुश रहो, फलो फूलों आप पाजी वाहे गुरु आपको करम दे मेरा गाड़ी मुझे दिला दो पाजी

दुखद यह खेल है

Context: Disagreeing with a political ideology is normal, but waging a war of hatred is the last resort to decapitate your enemy, almost infalliable. He who is on a mission to kill with hate can't be spoken to. दृश्य देख मैं विचलित हुआ प्रश्न पूछ मन भयभीत भया बदलने चला था मैं मूरख एक दिन मित्र था मेरा जो घृणा में लीन बात एक कहूं गर बात सुनो तो का कहूं अगर तुम जल रहे हो तो अपने ही पीड़ा की आग है अंदर उबल रहा जो लाख है शस्त्र उठाए पधारे हो ध्वंस करने का प्रण लिए हो सत्य और असत्य का अनैतिक मेल है नदी दूषित, जल निर्बल, दुखद यह खेल है

बेटी भी तू, और मां भी तू

बेटी भी तू, और मां भी तू अपनी मां को तूने जन्मा अपनी बच्ची को भी तूने जन्मा तुझी से शुरू, तुझी तक खत्म परिवार है   इस धरती ने तुझे पूजा भी यहीं पे ही तेरा तिर्रस्कार हुआ हर रोज़ हर पल तूने इसे जिया इन नाज़ुक कंधों से क्या क्या ना उठाया कब समझ पाएंगे लोग तुझे ना मैं जानता हूं ना शायद और कोई बस इसी तरह मुस्कुराती रह दुआ हर खुदा देगा पहुंचेगा हर खुदा तक

मोदी

तेरे आकार से नहीं  तेरे सरकार से नहीं तेरे कर्म से भयभीत  हैं शत्रु तेरे मोदी बीत गया वह समय जब  शत्रु विदेशी हुआ करता था दुर्भाग्य तेरा की आज वह तेरे घर का निवासी है पुत्र है तू इस धरती का  योगी है तू अपने कर्म का न रुकना तू कभी  न थकना तू कभी अज्ञात है वह  जो तुझसे अपरिचित है निंदा मैं तेरे उनका जीवन समर्पित है तेरा मंज़िल तेरी राह है तेरा शक्ति तेरा निष्काम भाव है जग ने तुझे जान लिया पर तेरे अपने तुझसे अजांन है झोला लेके आया था तू झोला लेके जायेगा कीचड़ लाछंन वृष्टि होगी तू विजयी होके जाएगा

किस्सा एक किस्सेवाले की

तेरे हर किस्से में एक कहानी है याद हर लम्हा तुझे ज़ुबानी है कभी खुद जिया, कभी देखा जीते हुए बहरहाल बयानेअंदाज़ यकीनन रूमानी है कोई सुनले जो किरदार का चेहरा तुझसे झुर्रियां तक नज़र आजाती पेशानी में है दर्द, कभी हंसी, हर फितरत, हर उमंग धड़कन के हर पहलु को सूना तू जाता है एक आईना धरे ठहरा हूँ तेरे सामने इसमें किस्सा है और एक किस्सेवाला है

JNU

जो मुफतखोरी से भी पेट न भरी थी किस बात की तुम्हे कमी हो गयी है? वह कौनसी आज़ादी चीन गयी है की ज़िम्मेदार तुमने मोदी को ठहराया है? वह कौनसी पट्टी पढ़ाई गयी तुमको की खून तुम्हारी काली हो गयी है? साथ जो खड़ा उसको दुश्मन कहते हो कन्हैया और अफ़ज़ल को दोस्त बताते हो सैंकड़ों खानदान राज किये, नज़र न आयी तुमको एक चायवाले से इतनी क्या परेशानी है तुमको क्या सी धी बात समझ नहीं आती तुम्हे? की गाड़ियों को जलाने की ज़रुरत आन पद गयी है आज़ादी के नारे लगाने वाले गद्दारों इस आज़ादी से वफ़ा करना सीख लो इस पवित्र भूमि के सपूत हो गर तो साबित करने के हज़ार तरीके हैं जो तांडव तुम आज मचा रहे हो सच तुम भी जानते हो, मगर मानोगे नहीं एक दिन माटी मांगेगा कीमत तुमसे फिर मुँह छुपाने कहाँ जाओगे?