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Showing posts from March, 2020

Nafrat ki panktiyan

नफरतों के पुल पर बांधा हुआ ज़िद अपनों को दाव पे लगाने का हौसला देता है जिनका भरोसा जीतकर यह सफर तय किया उन्हीं के अरमानों का कब्र खोदने से राहत मिलता है

My interview with an ad agency

अत्तर ख़रीदको मईँ चार्मिनारा में घूमा सीवी लेको मईँ इंडिया के चार किनारा में घूमा इंटरव्यू लेको सब्बिच बोले, बाद में फ़ोन करोजी तुमे फ़ोन करको पूछे तो बोले रिकारमेंट नइ जी हमे अयीसइच एक स्टोरी सुनाता जबी पोट्टा गिया चेन्नई दाड़ी काटको, सामपु लगाको, पइनके गया सूट बूट आउर टाई अम्मा बोली थी बीटा, दरगा में जाना, चद्दर चढ़ाना इंटरव्यू में जाको सब्बिच बोलना, नक्को घबराना अम्मा का बात माना, दिल में लिया मौला का नाम सीवी गीवी रेडी करको, चला पोटटा जिगड़ा थाम वह बोले, क्या जी तुमे चितरा गितरा लेके आती मईँ बोला, मेरा दिमागां इसमें बेस्ट कामा करती पन्ना पन्ना परखा, एंगल बदल बदल को देखा जॉइनिंग कबि करेगा, पुचको एक छोटा बम फेका कॉल्लेजी निकलको पैरान में फेका मईँ   तुमे डेटां बोलोजी अन्य्तिमे रेडी मईँ थोड़ा मुस्कुराया, थोड़ा दांतां दिखाया, फिर बोला बेटा, तुमे चित्रा गितरा कागज में अच्छा कारको डाला तुम चित्रा बनाओ जी, इदर कईको आता तुम्मारा टाइप का हम्मारा रिकारमेंट नई होता घर से फ़ोन आये तो अब्बा पूछे 'क्या हुआ'? रीडायल मारको, गल्ला स...