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Showing posts from January, 2020

The Lost Hindu

India, Hindustan...has always been invaded sinces ages...looted, plundered to the extent of rubble. Hindus...for all these centuries have been attacked, temples destroyed, forcibly converted, women raped...and it still happens in Pakistan which the new age protesters of India choose to ignore. What is tragic is that Hindus have always been a majority in this country since ages, since centuries. Even today, Hindus are a majority. And even today, Hinduism is being attacked. What has changed??? Nothing... Minority institutions in India are treated with a silver spoon, who are absolutely clear and open on their agenda. But when there is one BJP, or one RSS has a HINDUTVA identity, stands for Hinduism - the whole nation has a problem. I ask one question today to all the Haters Brigade of India - WHAT MAKES YOU SO ASHAMED IN BEING A HINDU?

Paaji

वैसे उम्र तो गुजारी हमने पर ऐसी मजबूरी ना देखी पाजी भाई को खोया हमने पर ऐसा दर्द ना देखा पाजी बेहद मुहहबत है इस लोहे से किसी और के लिए तरसा नहीं पाजी आप खुदा हो मेरे, रहम करो इल्जाम कुछ भी नहीं आप पे पाजी गुनाह कुछ तो किया होगा हमने वरना तीन साल से सजा क्यों मिली पाजी आप के लिए दुआ ही दुआ है खुश रहो, फलो फूलों आप पाजी वाहे गुरु आपको करम दे मेरा गाड़ी मुझे दिला दो पाजी

दुखद यह खेल है

Context: Disagreeing with a political ideology is normal, but waging a war of hatred is the last resort to decapitate your enemy, almost infalliable. He who is on a mission to kill with hate can't be spoken to. दृश्य देख मैं विचलित हुआ प्रश्न पूछ मन भयभीत भया बदलने चला था मैं मूरख एक दिन मित्र था मेरा जो घृणा में लीन बात एक कहूं गर बात सुनो तो का कहूं अगर तुम जल रहे हो तो अपने ही पीड़ा की आग है अंदर उबल रहा जो लाख है शस्त्र उठाए पधारे हो ध्वंस करने का प्रण लिए हो सत्य और असत्य का अनैतिक मेल है नदी दूषित, जल निर्बल, दुखद यह खेल है

बेटी भी तू, और मां भी तू

बेटी भी तू, और मां भी तू अपनी मां को तूने जन्मा अपनी बच्ची को भी तूने जन्मा तुझी से शुरू, तुझी तक खत्म परिवार है   इस धरती ने तुझे पूजा भी यहीं पे ही तेरा तिर्रस्कार हुआ हर रोज़ हर पल तूने इसे जिया इन नाज़ुक कंधों से क्या क्या ना उठाया कब समझ पाएंगे लोग तुझे ना मैं जानता हूं ना शायद और कोई बस इसी तरह मुस्कुराती रह दुआ हर खुदा देगा पहुंचेगा हर खुदा तक

मोदी

तेरे आकार से नहीं  तेरे सरकार से नहीं तेरे कर्म से भयभीत  हैं शत्रु तेरे मोदी बीत गया वह समय जब  शत्रु विदेशी हुआ करता था दुर्भाग्य तेरा की आज वह तेरे घर का निवासी है पुत्र है तू इस धरती का  योगी है तू अपने कर्म का न रुकना तू कभी  न थकना तू कभी अज्ञात है वह  जो तुझसे अपरिचित है निंदा मैं तेरे उनका जीवन समर्पित है तेरा मंज़िल तेरी राह है तेरा शक्ति तेरा निष्काम भाव है जग ने तुझे जान लिया पर तेरे अपने तुझसे अजांन है झोला लेके आया था तू झोला लेके जायेगा कीचड़ लाछंन वृष्टि होगी तू विजयी होके जाएगा

किस्सा एक किस्सेवाले की

तेरे हर किस्से में एक कहानी है याद हर लम्हा तुझे ज़ुबानी है कभी खुद जिया, कभी देखा जीते हुए बहरहाल बयानेअंदाज़ यकीनन रूमानी है कोई सुनले जो किरदार का चेहरा तुझसे झुर्रियां तक नज़र आजाती पेशानी में है दर्द, कभी हंसी, हर फितरत, हर उमंग धड़कन के हर पहलु को सूना तू जाता है एक आईना धरे ठहरा हूँ तेरे सामने इसमें किस्सा है और एक किस्सेवाला है

JNU

जो मुफतखोरी से भी पेट न भरी थी किस बात की तुम्हे कमी हो गयी है? वह कौनसी आज़ादी चीन गयी है की ज़िम्मेदार तुमने मोदी को ठहराया है? वह कौनसी पट्टी पढ़ाई गयी तुमको की खून तुम्हारी काली हो गयी है? साथ जो खड़ा उसको दुश्मन कहते हो कन्हैया और अफ़ज़ल को दोस्त बताते हो सैंकड़ों खानदान राज किये, नज़र न आयी तुमको एक चायवाले से इतनी क्या परेशानी है तुमको क्या सी धी बात समझ नहीं आती तुम्हे? की गाड़ियों को जलाने की ज़रुरत आन पद गयी है आज़ादी के नारे लगाने वाले गद्दारों इस आज़ादी से वफ़ा करना सीख लो इस पवित्र भूमि के सपूत हो गर तो साबित करने के हज़ार तरीके हैं जो तांडव तुम आज मचा रहे हो सच तुम भी जानते हो, मगर मानोगे नहीं एक दिन माटी मांगेगा कीमत तुमसे फिर मुँह छुपाने कहाँ जाओगे?