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Showing posts from May, 2020

Shaheed Rattan Lal

विरोध करना गुनाह नहीं था पर क्या पत्थर उठाना ज़रूरी था? कौन कहता है कि तुम साब मान लो पर क्या तुझे मारना ज़रूरी था? एक पिता, एक पति, एक बेटा क्या इतना हत्या ज़रूरी था? Note: Late Shri Ratan Lal was a police constable who lost his life in the Delhi riots post the Anti-CAA protests and agitations. These 2 lines are dedicated to him.

जय श्री राम

प्रभु तेरे कितने नाम, आज कौनसा पुकारूं श्री राम कहूं, भय है कोई आतंकवादी ना कह दे तुझी से भक्ति का आरंभ है, ज्ञान है, सत्य है तुझी पे भय का अंत है, परन्तु, फिर भी भय है तूने बनवास कटाई, हम एक दिन न ठीक से काटे तू मुस्कुराते चला गया, हम शिकायत करते रहे मर्यादा परुषोत्तम है तू, सब कुछ त्याग दिया हम घृणा को त्याग न सके, मर्यादा हरा दिया तेरी आवश्यकता है हमें, कहां चला गया तू तेरे लौ से वंचित यह धरती, पुकारे आज तुझे

बूढ़े बाबा १

जब वह लाठी उठाया था और बाबा की हड्डी टूटी थी कया तेरा हाथ नहीं कांपा था? जब उनकी जान जा रही थी सिसकियां निकल रही थी कया तुझे संकोच तक नहीं हुआ था? निहत्थे और मजबूत पर ऐसा झुंड बनाकर शिकार करते वक़्त कौनसा भेड़िया तेरे खून में दौड़ रहा था? ऐसा कया गुनाह किया था उस बाबा ने की निर्ममता की सारी हदों को पार कर कया ऐसा हैवानियत जायज़ था?

वह सरदार था

भेद भाव मिटाया जिसने, इज्जत बक्शा बिखरे हुए समाज को समेटा, वह सरदार था बाबर से लेके औरंगज़ेब की शमशीर तक सर कटवाया, खुदको वार दिया, वह सरदार था भूकंप, महामारी, तूफान हो या बहाड़ खाना खिलाया, कपड़ा दिलाया, वह सरदार था हिन्दुस्तान जब कटा था, दो टुकड़ों में बटा था जिसका कत्ल हुआ, जिसका पंजाब कटा, वह सरदार था सलाम है तुम्हारी कुर्बानी को, दुआ है मेरे रब से उन दरिंदों को ऐसी सज़ा मिले, जो उनके सात पुश्तों ने ना सोचा था

असमंजस

जे छूटे है आज लागे मेरा देस है जे जड़ को रखे है बुलाए अपने पास है पथ कौन सा लू मन में असमंजस है मन न माने पर तन तो जाने है कि कौन भी पथ लू पहुँच तो एकही जगह है