हां मैं हिंदू हूं इस देश का जिसे एक हिंदू ने मारा है गैरों ने तो बदन को छल्लि किया अपनों ने यहां रूह कुचल दिया है इस देश का जन्मा हूं मैं मिट्टी इसकी मुझमें है बसी फिर भी कट रहा हूं हर रोज मैं खामोश तमाशा देखता है कोई खून से लथपथ यह बदन मेरा चीख चीख के रूह पुकारे अपनों ने दफना दिया मुझे जिंदा था मैं, जबरन सुला दिया अब कहां कहां की बात सुनाऊं किस किस किस्से की याद दिलाऊं कश्मीर में घर छूट गया, बेटा भी बंगाल में बेटी थी, बहन ने लूट लिया केरल में धर्म छूट गया, बेटा बिक गया गोआ में पूरा परिवार बिखर गया मेरे धर्म को मुझसे छीन लिया मेरे मंदिर मूरत को तोड़ दिया आवाज़ देता हूं, कोई सुनता नहीं पुकारता कब से में, कोई आता नहीं किस धुन में हो, ओ सोने वालों मां की लाज खतरे में है, अब उठ भी जाओ अब न जागोगे, तो कब न जग पाओगे अब न उट्ठोगे तो कब न उठ पाओगे हां मैं हिंदू हूं इस देश का जिसे एक हिंदू ने मारा है