Alvida Anil
अभि तो कहीं देखा था अब कहां चला गया है एक पल हंसता तो था वह दूजे में नजाने कहां चला गया है अनबुझ सी यह जिंदगी कितनी अनजान अजनबी सी है एक हस्ता खेलता घरौंदा पल में बिखर के चूर हो गया है जाना पहचाना जो था पलक झपकते पराया हो गया है नज़र आता तेरा मुस्कुराता चेहरा जैसे तू कहीं तो पहुंच गया है रह गई है बातें तेरी एय दोस्त कुछ न बचा, बस यही अब रह गया है