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Kal phir

कल फिर कल फिर एक ख्वाब देखा, फिर वो यादें ताज़ा हो गई फिर वो चेहरा नजर आया, आंखें फिर नम हो गई जागा हुं अभी फिर भी बेहोशी का आलम मदमस्त है ना वो करीब से तुम्हे देखना, महसूस करना, बाहों में लेना तेरा चेहरा, तेरी आंखें, उनमे भरा प्यार महसूस करना जो हकीकत न हो पाई, सपनों में यूं जिंदा हो जाना एक नादान सपने से दिल में यूं एक सैलाब आ जाए  सोचो तुम मेरी आगोश में होती तो क्या क्या न हो जाए 

Yeh Shor O Gul ka Sama

यह शोरो गुल का समा, यह सोलों का छाया आसमान में काफिला शोहरत का बदनुमा दिखावा, अजीबो गरीब यह चलता हुआ सिलसिला जलाता उड़ाता हर कोई है आज, कोई कम कोई थोड़ीसी ज्यादा जितनी हैसियत, उतनी शोर, और उतना खुदगर्जी फायदा डरे सहमे से जानवर, दुबक के गाड़ियों के नीचे छुपते हुए हैरान परेशान आंखों में हजारों सवाल पूछते हुए और भूखे पेट कुछ इंसान, इस तमाशे को देखते हुए कमाया न जिसे कभी, देखते हैं आज उसे जलते हुए यह शोरो गुल का समा, यह सोलों का छाया आसमान में काफिला...