Kal phir

कल फिर

कल फिर एक ख्वाब देखा, फिर वो यादें ताज़ा हो गई
फिर वो चेहरा नजर आया, आंखें फिर नम हो गई

जागा हुं अभी फिर भी बेहोशी का आलम मदमस्त है ना
वो करीब से तुम्हे देखना, महसूस करना, बाहों में लेना

तेरा चेहरा, तेरी आंखें, उनमे भरा प्यार महसूस करना
जो हकीकत न हो पाई, सपनों में यूं जिंदा हो जाना

एक नादान सपने से दिल में यूं एक सैलाब आ जाए 
सोचो तुम मेरी आगोश में होती तो क्या क्या न हो जाए 

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