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Showing posts from April, 2020

बूढ़े बाबा २

ओझल नहीं होता वह नज़ारा बिनती और बर्बरता का दर्दनाक संगम इस पार से उस पार तक का फासला उसको तय करने का अमानवीय फैसला वह चेहरा आंसुओं भरा वह प्राणों की भिक्षा मांगते हुए बूढ़े बाबा वह झुंड में भेड़ियों सा हत्या करना ओझल नहीं होता वह नज़ारा कहां गए वह मित्र मेरे वह धर्मनिपेक्षता के रखवाले कहां गए वह आजादी के नारे लगाने वाले वह मानवता के भाषण देने वाले  आज इतने चुप क्यूं बैठे है सब वह आवाज़ उठाने वाले,  वह राष्ट्रवादी, वह भारी पड़ने वाले कहां गए वह देशप्रेमी, वह न्याय के प्रतिमाएं चौकीदार को चोर कहके विद्रोह करने वाले इस अमानवीय नरसंहार पे खामोश रहने वाले धिक्कार ना लो, लोगों की आह ना लो खून को खून रहने दो, पानी ना बनाओ इन्सानियत पे यूं बोझ न बनो  जो सही में गलत है, उसके लिए आवाज़ उठाओ जो गलत गलत है, उसपे वक़्त बर्बाद ना करो देश पुकार रहा है, अपने सोए हुए ज़मीर को जगाओ

Bullet Sardaar

वैसे उम्र तो गुजारी हमने पर एसी मजबूरी ना देखी पाजी भाई को खोया हमने पर ऐसा दर्द ना देखा पाजी बेहद मुहहबत है इस लोहे से किसी और के लिए तरसा नहीं पाजी आप खुदा हो मेरे, रहम करो इलज़ाम कुछ भी नहीं आप पे पाजी गुनाह कुछ तो किया होगा हमने वरना तीन साल से सजा क्यों मिली पाजी आप के लिए दुआ ही दुआ है खुश रहो, फलो फूलों आप पाजी वाहे गुरु आपको करम दे मेरा गाड़ी मुझे दिला दो पाजी