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Kahaani

कहानी बनती नहीं अपने आप, रचना पड़ता है वह रचती कहां अपने आप, उस में से गुजरना पड़ता है खुदबखुद नजर आता नहीं रास्ता, बनाना पड़ता है वह बनता भी कहां अपने आप, चलना पड़ता है जिंदगी कटती नहीं अपने आप, जीना पड़ता है जान रहती कहां अपने आप, सांस लेना पड़ता है