Corona
एक दौर, एक दरिया, लहू का, लावा का कुछ पार हुए, कुछ बह गए, कुछ उभर न पाए कहकहे, कहकहे, कहकहे चीखें, रोने की, कानों को चीरती हुई कुछ रौंदे गए, कुछ कुचले गए जिंदा मुर्दा सभी ने देख लिया करीब से दर्द का कैसा मंजर, या खुदा बेबसी की कैसी दीवानगी, कैसा लहर उस बच्ची का क्या होगा जिसने पिता खोया उस औरत का क्या होगा जिसकी चूड़ी टूटी क्या तेरा शुक्रिया अदा करूं की तूने जिंदा रखा या शिकायत करूं की तूने कितनों को सुला दिया पर उम्मीद कब हारी थी की अब दम तोड देती उसके सीने में तो तू धड़कता है, तेरा पाक बसता है एक दूसरे का हाथ भी थामेंगे, सहारा भी देंगे जिंदा भी रहेंगे, और जिंदा भी रखेंगे