बूढ़े बाबा २

ओझल नहीं होता वह नज़ारा
बिनती और बर्बरता का दर्दनाक संगम
इस पार से उस पार तक का फासला
उसको तय करने का अमानवीय फैसला

वह चेहरा आंसुओं भरा
वह प्राणों की भिक्षा मांगते हुए बूढ़े बाबा
वह झुंड में भेड़ियों सा हत्या करना
ओझल नहीं होता वह नज़ारा

कहां गए वह मित्र मेरे
वह धर्मनिपेक्षता के रखवाले
कहां गए वह आजादी के नारे लगाने वाले
वह मानवता के भाषण देने वाले 

आज इतने चुप क्यूं बैठे है सब
वह आवाज़ उठाने वाले, 
वह राष्ट्रवादी, वह भारी पड़ने वाले
कहां गए वह देशप्रेमी, वह न्याय के प्रतिमाएं

चौकीदार को चोर कहके विद्रोह करने वाले
इस अमानवीय नरसंहार पे खामोश रहने वाले
धिक्कार ना लो, लोगों की आह ना लो
खून को खून रहने दो, पानी ना बनाओ

इन्सानियत पे यूं बोझ न बनो 
जो सही में गलत है, उसके लिए आवाज़ उठाओ
जो गलत गलत है, उसपे वक़्त बर्बाद ना करो
देश पुकार रहा है, अपने सोए हुए ज़मीर को जगाओ

Comments

Popular posts from this blog

Thodi si

Yehaan Ke

Kya Hota?