बूढ़े बाबा १

जब वह लाठी उठाया था
और बाबा की हड्डी टूटी थी
कया तेरा हाथ नहीं कांपा था?

जब उनकी जान जा रही थी
सिसकियां निकल रही थी
कया तुझे संकोच तक नहीं हुआ था?

निहत्थे और मजबूत पर ऐसा
झुंड बनाकर शिकार करते वक़्त
कौनसा भेड़िया तेरे खून में दौड़ रहा था?

ऐसा कया गुनाह किया था उस बाबा ने
की निर्ममता की सारी हदों को पार कर
कया ऐसा हैवानियत जायज़ था?







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