असमंजस

जे छूटे है आज
लागे मेरा देस है

जे जड़ को रखे है
बुलाए अपने पास है

पथ कौन सा लू
मन में असमंजस है

मन न माने
पर तन तो जाने है

कि कौन भी पथ लू
पहुँच तो एकही जगह है

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