वह सरदार था
भेद भाव मिटाया जिसने, इज्जत बक्शा
बिखरे हुए समाज को समेटा, वह सरदार था
बाबर से लेके औरंगज़ेब की शमशीर तक
सर कटवाया, खुदको वार दिया, वह सरदार था
भूकंप, महामारी, तूफान हो या बहाड़
खाना खिलाया, कपड़ा दिलाया, वह सरदार था
हिन्दुस्तान जब कटा था, दो टुकड़ों में बटा था
जिसका कत्ल हुआ, जिसका पंजाब कटा, वह सरदार था
सलाम है तुम्हारी कुर्बानी को, दुआ है मेरे रब से
उन दरिंदों को ऐसी सज़ा मिले, जो उनके सात पुश्तों ने ना सोचा था
Comments
Post a Comment