जय श्री राम

प्रभु तेरे कितने नाम, आज कौनसा पुकारूं
श्री राम कहूं, भय है कोई आतंकवादी ना कह दे

तुझी से भक्ति का आरंभ है, ज्ञान है, सत्य है
तुझी पे भय का अंत है, परन्तु, फिर भी भय है

तूने बनवास कटाई, हम एक दिन न ठीक से काटे
तू मुस्कुराते चला गया, हम शिकायत करते रहे

मर्यादा परुषोत्तम है तू, सब कुछ त्याग दिया
हम घृणा को त्याग न सके, मर्यादा हरा दिया

तेरी आवश्यकता है हमें, कहां चला गया तू
तेरे लौ से वंचित यह धरती, पुकारे आज तुझे

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