JNU

जो मुफतखोरी से भी पेट न भरी थी
किस बात की तुम्हे कमी हो गयी है?

वह कौनसी आज़ादी चीन गयी है की
ज़िम्मेदार तुमने मोदी को ठहराया है?

वह कौनसी पट्टी पढ़ाई गयी तुमको
की खून तुम्हारी काली हो गयी है?

साथ जो खड़ा उसको दुश्मन कहते हो
कन्हैया और अफ़ज़ल को दोस्त बताते हो

सैंकड़ों खानदान राज किये, नज़र न आयी तुमको
एक चायवाले से इतनी क्या परेशानी है तुमको

क्या सीधी बात समझ नहीं आती तुम्हे?
की गाड़ियों को जलाने की ज़रुरत आन पद गयी है

आज़ादी के नारे लगाने वाले गद्दारों
इस आज़ादी से वफ़ा करना सीख लो

इस पवित्र भूमि के सपूत हो गर
तो साबित करने के हज़ार तरीके हैं

जो तांडव तुम आज मचा रहे हो
सच तुम भी जानते हो, मगर मानोगे नहीं

एक दिन माटी मांगेगा कीमत तुमसे
फिर मुँह छुपाने कहाँ जाओगे?

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