कभी मैं गुज़रा नहीं
कभी मैं गुज़रा नहीं,
की मुझमे कुछ गुज़र जाता है
कभी मैं रुका नहीं,
की मुझमे कुछ थम जाता है
ढूंढ़ने लगा हूँ दोस्तों
खबर नहीं किस चीज़ को
खुद को तनहा पाता हूँ,
फिर महसूस करता हूँ तुम सब को
गीले शिक़वे तो होंगे ज़रूर,
कोई बूत या फरिश्ता तो नहीं हम
फिरभी रिश्ता तो है,
बंधे थे किसी दिन, न टूटे न हुए काम
शायद इसीको दोस्ती कहते हैं,
और यह दोस्तों का साथ
करीब हो या दूर,
मगर चलते रहे लेके हाथों में हाथ
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