हम भिन्न भिन्न हैं

हम भिन्न भिन्न हैं उतने 
जितनी हमारी हाथ की है रेखाएं 

हम पथिक एक ही पथ के 
चाहे जितनी भिन्न हो दिशाएं 

प्रथम भी हम, सेष भी हम 
परिपूर्ण रूप से, केवल हम ही हम 

आनंद भी हम, क्लेश भी हम 
करता भी हम, भरता भी हम 

भेंट होती तो है, अनेक संग किन्तु 
केवल क्षण भर के हेतु 

जीवन के पगडण्डी पे अग्रसर 
अपने ही पग बढ़ाने पड़ते हैं हर प्रहर 

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