तू नशा है मेरी
तू नशा है मेरी
मेरा हर कतरा तुझमे डूबी है
एक बार जो तुझे चाहा
उम्र कम लगने लगी है
तेरा हुस्न, तेरी आँखें
तेरा कशिश, तेरा ज़हन
न ढली, न बदली
गवाह हर सांस हर धड़कन
तू दर्द है मेरी ज़िन्दगी का
एक मीठी खंजर
दवा, दुआ, लाख कोशिशें की
कम न होती मगर
तू हकीकत है, वहम है
या सपना कोई ?
ऐसा मुझमे समायी
क्या रूह है तू कोई?
एक एहसास है, एक आहट है
एक हिस्सा है मेरा तू
सच तो हो नहीं सकता
शायद एक ख्याल है तू
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