बस्तीयों में

साँसें उधर भी हैं 
जी हम भी रहे हैं 

इधर सब भरा है 
वहाँ टुकड़े गिरे हैं 

किसने चीनी उसकी रोटी 
या उसने बनाया ही नहीं?

खली पेट सोया नहीं 
रोटी उसको मिली नहीं 

भरा जिसका पेट है 
उसने रोटी सुना ही नहीं 

वह तस्वीर में है 
ज़िक्र में भी है 

खबर में भी है 
और बेखबर भी है 

हर सुनेहेरे शहर में 
नालों में, गन्दी गालयीयों में 

वह धूल में बस्ता है 
धूल की इंतज़ार में 

बस्ता है वह 
बस्तीयों में



Comments

Popular posts from this blog

Thodi si

Yehaan Ke

Kya Hota?